Posted in Poem

ऐ भारत!


फक्र होगा उस दिन मुझे,
जब बन जाऊं कुछ काबिल मैं…
देश और इसकी मिट्टी के लिए दिखा पाऊँ भक्ति-निष्ठा को मैं।
और ऊँचा, और निराला.. भारतवर्ष का नारा है ,
कोशिश जारी रखने की कसम खाई और वादा है।।
जता पाऊँ की प्यारा है तू, कैसे तेरी इज़्ज़त न करू
शत शत नमन करूँ तुझको मैं, ऐ भारत, तू न्यारा है, ऐ भारत, तू हमारा है।।
निभा पाऊँ इस सपने को, कोशिश है, मझधार नही, है भक्ति कोई भार नही!!
ऐ भारत तू आबाद है, ऐ भारत तू आबाद रहे ।।

Author:

I'm a law student at a private uni. Apart from being an enthusiast in political developments of the world, I also believe myself to be an eloquent writer. Nationalist on grounds, I like discussing about issues which matter my country and the world at large. बाकी कविताएँ तो देख ही ली होगी!

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