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वो जिंदा है

कौन कहता है इंसानियत मर चुकी है? वो अभी भी जिंदा है।
हाँ, थोड़ी सहम गयी है, थोड़ी ठहर गयी है… पर इंसानियत, जिंदा है..।
गुस्सा आता है देख, उन लोगों को, जो बाकियों की आड़ में रोना करते है…
दूसरी तरफ वो जो बुराई देख भी आवाज़ नहीं उठाते है।
अपने लोगों के लिए कुछ करना तो चाहते है.. पर संसार की बुराई का स्तर देख, थोड़ा रुक जातें है।

याद रखना, इंसानियत मरी नही, अभी भी जिंदा है,
लोगों के दिल में बुराई ही सही, कहीं ना कहीं अच्छाई का एक टुकड़ा जिंदा है।
और एक दिन कुछ तो बदलेगा… और रावण फिर से हारेगा।

सीता को हरने वाला नही, हमारे अन्दर छिपा, बसा रावण! इंसान को जानवर बनाने वाला, दुनिया को बुराई की ओर धकेलने वाला रावण।
जिंदा इंसान को लाश बनाने वाला रावण… हारेगा।

तब मंद सी रोशनी दिखेगी… बाहर ख़ुशी से नाचती, एक चमक के साथ सर उठाती, एक सौम्य सी आवाज़ आएगी…
मैं जिंदा हूँ, मरी नहीं, मैं जिंदा हूँ… इंसानियत जिंदा है..।

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विरासत

भीगी सड़के, लबों पे तेरा ही नाम…
जन्नत कहूँ या कहूँ सौहार्द,
रचना चाहूँ तेरे लिए मैं पैगाम…
कितने बरस हैं बीत गए,
खड़े हो तुम अब भी शान बन कर,
जड़ों से जुड़े शहर के बीच…
जहाँ कभी नवाबों के हुआ करते थे,
अब पूरे हिंदुस्तान के हो चुके हो…

ये बरसात गुनगुनाए गीत तुम्हारा,
शौर्य, गौरव, न जाने क्या-क्या थे तुम…
अब याद धुंधली भले हो चली है,
पर आज भी बड़े शान से खड़े हो तुम,
तुम्हे देख हर बार पर, आंखे चमक और फक्र साथ चला आता है।
विरासत को भूल ज़माना ज़रूर हो चला है,
पर उसे देख… सुकून जो साथ है ना, उसका अलग ही मज़ा आता है।

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साँझ:

ये अंधेरा घना, बेहद घना है…
ज़िंदगी रुकी सी महसूस होने लगी है
कहीं कोई खौफ सता रहा है, कहीं डरावनी पिक्चरों की परछाई साथ चलने लगी है
इतने होते हुए भी लोग अकेले हो गए है
बस ये चील की आवाज़ें, ये जनाज़ों का शोर, शायद यही बचा है जो अब महसूस होता है
बाकी गीली मिट्टी सूख चुकी, अब पत्थर कहाँ पिघलते है
ये सन्नाटा भी सहन नही होता और वहाँ आवाज़ों का ढेर थमता नही
ये जनाज़े याद हैं दिलाते, कैसे शोर शांति में लिपट जाता है,
कैसे सन्नाटा शोर बन जाता है.. .
किसी की ज़िंदगी रुकी सी जाती मानो, कोई आगे बढ़ जाना चाहता है
कोई विलीन हो उठता है, कोई करुणा में बह चला जाता है…
पर ये सत्य फिर सामने आता, महसूस सबको होता है।
अपनी धड़कन, उंगलियों का भारीपन, चलने की आहट, मस्तिष में बदलते विचार
जब हर कदम महसूस होने लगे, तब नहीं सब कुछ भारी समझ आता है?

शोर सन्नाटा हो जाता है, वहाँ घोर घन सन्नाटा शोर में विलुप्त हो जाता है।

I started writing this piece with some different thought in mind but completed it with another one.

There might be times when people criticize you or you feel they always do, but remember the fact that you are ‘people’ too. You got the opportunity to change the definition of people for somebody else. Just remember the fact that nobody can possibly be with you forever but their wishes and words and shadow do remain.

People asking all over why everyone gets to remember things only after something traumatizing happens… My friend, it takes a shock to bring people back to normal at times, we’ve been so indulged in the race of victory, success and money and progress and life, that we forget what important we’ve left or that there might be someone who’s just a kind word away. And not just that people realise lately, it does come with some guilt, though not enough to bring people back. But what we can do is, knowing the fact that we don’t know how and where the person gone is, be there for those aggrieved. That has the power to make peace. I assure. Till time, be the people. Life is in the mid of extremes, just like the evening, neither too bright nor too dark… समय है साँझ का

Just a kind word away!

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Sayonara..

Sayonara! A word that sounds great…
But has so much feels and pains,
Sometimes easy to say…
But not so, could stay!

Fights and laughs change to Thoughts…
The blunders done, crack up!
The gear of new beginning,
With old fear of losing…
Regrets of none,
With tears quite earned!

Knowing the factuals at end,
Grieve for the same ease (maybe that’s a trend 😉
Break of emotional connect,
Which can’t be replaced or further met!

The journey too gave inspirational ones…
Or many became just fable!
As pages turned one beyond the other,
Life installed many more cadre!

A word that sounds great…,
But has much feels and pains!
Sometimes easy to say…
But not could ever stay!

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हे चिरैया , है आशा की किरण

चिरैया, गौरैया, ना जाने तुम्हारे कितने नाम

फिर क्यों हैं लोग तुमसे और तुम्हारे घटते क्रम से अंजान?

क्या हो गयी तुम इतनी बेसुध और अंजान, कि कोई न जाने तुम्हे,पशु और इंसान?

क्या इंसानों में इतनी आत्मीयता भी नही बची, कि एक नज़र देख ले प्रकृति की ओर,बची है भी या नहीं?

पर आज की ‘हाईटेक’ दुनिया में, जहाँ लोग है एक दुसरे से ही अंजान,

क्या समय होगा इतना,की देख ले प्रकृति को एक नज़र, अपने को सुधार?

मत जाओ गौरैया, होकर इतनी दुखी और उदास, निकलेगा कोई तो हल, जिससे आएगी तुम्हारी आखों में चमक और स्थिति में सुधार…

थोडा़ सा और कर लो तुम इंतज़ार, थोडा सा और कर लो तुम इंतज़ार!

ज़रूर मिलेगी कोई तो आशा की किरण या दरवाज़े की चाबी, जिससे खुल जायेगा इंसानों की आख़ों का ताला…

जानती हूँ की समय लगेगा थोडा़, पर समय के साथ ही तो बदलती है ये दुनिया!

शायद,

नही जानते ये लोग, की जिस छोटी सी गौरैया को हर दिन अपने आंगन में चहचहाता देखा ,उसके साथ खेला, आज वही बेचारी जा रही है छोड़ के अपना बसेरा…

दिल है की पत्थर , थोडा़ ख्याल तुम भी कर लो, आँगन में पानी भर एक सकोरा ही रख दो,

बस, आँगन में पानी भर एक सकोरा ही रख दो…

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I was younger..

When I was younger…,

I wanted to be a cinestar,

walk on ramp, and roam in luxurious cars!

some years later… I aimed to be a doctor,

treat the patients and fly over a copter!

Then I thought to be an air-hostess?!

wear mini-skirts and travel all around the whole world…

Started loving social,

Being true patriot, wanna serve my country,

stop the corruption and punish the traitors!

I know it isn’t innate and not a bed of roses too…

But, I know if your motives are true…, there’s nothing to stop you!

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I Wanted To Be A Leader

Once I decided to be a leader.,

Not for any kinda fun nor was I a Traitor…

I just wanna do something for my family, much for my country!

Once I decided to be a leader…

Not for fun, but I wanted my turn,

Where I can safeguard people, do something for them, protect lil’ saples!

But then I remembered…

I’ve to cross elections too,

Will anyone be there to press the key for me?

Do I have anything to say in my achievement speech?

Have I been a player or won medals to show & admire?

May be Yes, May be No…

But I can tell that I’m a good person,

Maybe, others have much more qualifications,

But am proud of my Inner versions…

Once I decided to be a leader,

Not for fun, but just to make all one,

Just wanna be a leader,

Cuz I want my ideas to Feasible!

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बचपन….

मैं जीवन जीने के काबिल हूँ या नहीं,

बस मुझे जीना सिखा दो!!

अगर लौट के आ सकता है मेरा बचपन,

तो लौटा दो उसे मुझे,बिना किसी अनबन!!

वरना इस दुनिया में…

न तो ज़मीर रहेगा जिंदा,

और,न ही कबीर करेगा बुराई की निंदा,

चाहे बन जाये कितना भी बड़ा गरीब(अमीर),

कभी दिल में फ़क़ीर न होगा जिंदा!

जब लौट आएगा वापस हमारा बचपन…

तो और भी खुबसूरत,

और भी ऊचाँ,

मेरे देश का नाम हो जायेगा,

हिन्दू-मुसलमान नही,सिर्फ इंसान ही इंसान पुकारा जायेगा!

चाहे कितनी बार ही क्यों न गिरो, हर बार एक नया मौका मिलता जायेगा,

ऐसा नही की गलती करने की आदत पड़ जाएगी,

पर गलती करके सही रास्तें की पहचान हो जाएगी!

रिश्ते भूल सिर्फ निंदा और लालच जानते है अभी सब,

जब लौट आएगा वापस हमारा बचपन,

तो मासूमियत के अलावा कुछ न रह जाएगा तब!

जिंदगी शतरंज के जैसी हो गयी है,इसे सूडोकु के समान बनाना चाहिए,

हर मौके पर फतह नहीं,सिर्फ सही रहना आना चाहिये…

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थोड़ा सा तो ठहर जा…

वादा कर अपने आप से तू,

किसी के लिए कभी खुद ना बदले…

अपनी इच्छाओं को मार, दूसरों के लिए न तरसे!                                                                 

कर वही, जो सही लगे,

ना की वो जो लोग कहें…

जिंदा हो, इंसान हो तुम,

वक्त बुरा भले, सही तो हों?!

कितने बरस हैं बीत गए…

आगे पीछे दौड़ते दौड़ते…

अब बस तू बैठ जा… थोड़ा सा तो ठहर जा…

वक्त का पहिया चलने दे,

दिन को थोड़ा ढलने दे…

विचारों को विराम दे,

अपने आप को थोड़ा संभाल ले…

इंसान है तू, भगवान नही,

अडिग रहे, गलत सही!

खुश रह क्यों तू इंसान है…

ना कर अफ़सोस, तुझपे इतना भार न है…

ध्यान रख, जिंदा है तू… अपनी खुशियों का रचयिता-क्रेता है तू

जो बीत गया सो बीत गया,

अब बस तू बैठ जा… थोड़ा सा तो ठहर जा,

विचारों को विराम दे…

भागम-भाग रोक कर, वक्त का पहिया चलने दे …

दिन को थोड़ा ढलने दे…!

 

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ऐ भारत!

फक्र होगा उस दिन मुझे,
जब बन जाऊं कुछ काबिल मैं…
देश और इसकी मिट्टी के लिए दिखा पाऊँ भक्ति-निष्ठा को मैं।
और ऊँचा, और निराला.. भारतवर्ष का नारा है ,
कोशिश जारी रखने की कसम खाई और वादा है।।
जता पाऊँ की प्यारा है तू, कैसे तेरी इज़्ज़त न करू
शत शत नमन करूँ तुझको मैं, ऐ भारत, तू न्यारा है, ऐ भारत, तू हमारा है।।
निभा पाऊँ इस सपने को, कोशिश है, मझधार नही, है भक्ति कोई भार नही!!
ऐ भारत तू आबाद है, ऐ भारत तू आबाद रहे ।।